आम की उन्नत बागवानी करने का सही तरीका के बारे में जानते हैं
कम अम्लीय मिट्टी में आम की फसल अच्छी होती है। कच्चे आम का उपयोग अचार, चटनी और आमचुर में होता है। पके हुए आम से जाम, अमट, कस्टर पाउडर, टाॅफी इत्यादि बनाया जाता है सूखे हुए फूल से डायरिया एवं डिसेन्ट्री का भी इलाज सफलतापूर्वक किया जाता है।
प्रभेदः-
मई में पकने वालीः- बम्बई, स्वर्णरेखा, केसर, अलफांसो।
🔔 Don't miss our latest updates!
Tap the bell icon at the top of this channel to turn on notifications.
जून में पकने वाली दशहरी, लंगरा, कृष्णभोग, मल्लिका।
जुलाई में पकने वालीः- फजली, सिपिया, आम्रपाली।
अगस्त में पकने वालीः- बथुआ, चौसा, कातिकी।
प्रसार विधि
आम की उन्नत बागवानी के लिए रूट स्टोक के लिये पके हुए फल से स्टोन निकालकर एक सप्ताह के भीतर मिट्टी में बो दें। दो-तीन सप्ताह की आयु में पौधों को नर्सरी बेड में ग्राफ्टिंग के लिये स्थानान्नतरित करते है। ट्रान्सप्लांटिंग के पहले नर्सरी बेड में प्रचुर मात्रा में कम्पोस्ट या पत्ता खाद डालते हैं। जुलाई-अगस्त में ग्राफ्टिंग करते हैं।
भिनियर ग्राफ्टिंग/साइड ग्राफ्टिंग
सही साइन जिसमें तीन से चार महीने का सूट एवं फूल नहीं हो का चुनाव करें। सूट को मदरप्लांट में घुसा दें। बड को बहार निकाल लें। यह कार्य उत्तरी भारत में मार्च से सितम्बर तक किया जाता है।
स्टोन ग्राफ्टिंग
आम के बीज को बालू के मेड़ पर रखकर सड़े हुए पत्तों से 5 से 7 से.मी. मोटा ढँक देते हैं। नवजात पौधा 8 से 15 दिन में निकल जाता है। साइन को रूट स्टाॅक में उदग्र रूप से छेद करके दोनों को सटाकर पाॅलीथिन टेप से अच्छी तरह से बाँध देते हैं। इसके तुरन्त बाद पॉलीथिन बैग में जिसमें पहले से आधा मिट्टी और गोबर की खाद रखी हुई हो, उसमें लगा देते हैं। इसमें नियमत रूप से पानी डालते हैं एवं धूप-छाँव में रखते हैं ताकि सूर्य और बारिश का सीधा असर न हो।
खाद उर्वरक की मात्रा
आम की उन्नत बागवानी के लिए शुरू के दस साल तक प्रत्येक पौधा को प्रतिवर्ष 160 ग्रा. यूरिया, 115 ग्रा. स्फूर एवं 110 ग्रा. म्यूरेट आॅफ पोटाश दें। दस साल के बाद प्रत्येक पौधा में खाद की मात्रा प्रतिवर्ष दस-गुणा कर दें। बढ़े हुए खाद की मात्रा को दो बराबर भाग में करते हुए पहला भाग जून-जुलाई में और दूसरा भाग अक्टूबर में दें।
आम में प्रायः जिंक, मैग्नीशियम और बोरॉन की कमी पाई जाती है, जिसे सुधारना अति आवश्यक है। जिंक की कमी के लिये जिंक सल्फेट का 3 ग्रा. प्रति ली. पानी में मिलाकर साल में तीन छिड़काव फरवरी-मार्च-मई महीने में करें।
बोरॉन के कमी के लिये 5 ग्रा. बोरेक्स प्रति ली. पानी में और मैग्नीशियम की कमी के लिये 5 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट प्रति ली. पानी में मिलाकर छिड़काव करना लाभदायक होता है।
10 किलो कार्बनिक पदार्थ प्रति पेड़ प्रतिवर्ष के हिसाब से, रासायनिक खाद के साथ मिलाकर देने से आम का उत्पादन बढ़ जाता है। कार्बनिक पदार्थ के रूप में सड़ी हुई गोबर, केंचुआ खाद या सड़ी गली पत्ते वाली खाद का भी प्रयोग कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग क्या होता है इसे जानने का सही तरीका
सिंचाई
जिस पौधा में फल लगना शुरू हो जाय उसमें 10 से 15 दिनों के अन्तराल पर पानी अवश्य दें। इससे फल का आकार बढ़ जाता है और फल का असमय गिरना कम हो जाता है। अच्छा मंजर आने के लिये मंजर आने के दो-तीन महीना पहले से ही पानी देना बन्द कर दें क्योंकि इस बीच सिंचाई करने से मंजर आना कम हो जाता है और नया पत्ता बढ़ने लगता है।
पौधा रोपने का तरीका
बरसात का मौसम आम लगाने का उपयुक्त समय है। आम का कलम लगाने के पहले कुछ बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक होता है।
अप्रैल-मई महीने में 1 मी. लम्बा, 1 मी. चौड़ा और 1 मी. गहरा गड्ढा खोद लिया जाता है। गड्ढे-से-गड्ढे की दूरी 10-10 मी. रखी जाती है।
प्रत्येक गड्ढे में गोबर की सड़ी हुई खाद 10 किलो, करंज की खल्ली 2 किलो, सिंगल सुपर फास्फेट 1 किलो, म्युरेट आॅफ पोटाश आधा किलो, लिण्डेन धूल 100 ग्राम, अच्छी तरह से मिलाकर डाल दें। तत्पश्चात आम के वृक्ष का रोपण बरसात में करें। शुरू में रोज सिंचाई तब तक दें जब तक कि कलम का जड़ मिट्टी में अच्छी तरह से लग न जाये।
अन्तर्वर्तीय फसल
आम का कलम गड्ढा में लगाने के पाँच साल तक अन्तर्वर्तीय फसल लिया जा सकता है। अन्तर्वर्तीय फसल के रूप में टमाटर, मटर, सोयाबीन, उड़द, मक्का, मडुवा, चना, तिसी (अलसी), गेहूँ लिया जा सकता है।
ये भी पढ़ें आलू की खेती करने का सही तरीका
खरपतवार का नियंत्रण
बगीचा को स्वस्थ रखने के लिये खरपतरवार का नियंत्रण जरूरी है। मानसून के पहले घास निकाल दें और दूसरी बार अक्टूबर माह में खरपतवार निकालें। जरूरत पड़े तो रासायनिक तृणनाशक एट्राजीन 2.5 किग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से खरपतवार निकलने से पहले छींट दें और खरपतवार निकलने के बाद ग्रामोक्सोन 3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छींट दें।
फल का गिरना
फल गिरने से रोकने के लिये एन.ए.ए. और जी.ए. (0.005 प्रतिशत) का घोल बनाकर छिड़काव करें।
आम का फसल प्रत्येक साल हो, इसके लिये टहनी को काटें एवं उर्वरक का समुचित प्रयोग करें। किस्में जैसे मल्लिका, आम्रपाली, अरका पुनीत एवं पी.के.एम. 1 प्रत्येक साल फल देती है।
कीट एवं उनकी रोकथाम
1. मधुआ (हाॅपर) मेलाथिआॅन 50 ई.सी. का 60 मि.ली. अथवा मेटासिस्टोक्स 25 ई.सी. का 25 मि.ली. दवा 20 लीटर पानी में मिलाकर वृक्ष के भींगने तक छिड़काव करें। वृक्ष पर यह छिड़काव तीन बार करें।
पहला- मंजर आने से पहले।
दूसरा- 5-10 प्रतिशत फूल आने पर।
तीसरा- दूसरे छिड़काव के एक महीना बाद जब फल मटर के आकार का हो जाये।
2. मिलीबग (बभनी) पेड़ के तने पर 60 से 100 सेमी. ऊँचाई पर पाॅलीथिन की 20 सेमी. चौड़ी पट्टी बाँधकर निचले सिरे पर 5 सेमी. की चौड़ाई के आॅस्टिको पेंट अथवा इस्सोफट ट्री ग्रीज 5 सेमी. की चौड़ाई में लेप दें।
3. शुट गाॅल
(क) मध्य अगस्त से 15 दिनों के अन्तर पर रोगर अथवा नुवाक्राॅन दवा 2 मिली. प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करें।
(ख) दिसम्बर-जनवरी के महीने में गाँठ से नीचे थोड़ी सी पुरानी लकड़ी के साथ काट कर जला दें।
4- तना छेदकनुवाक्राॅन/मेलाथिआॅन दवा का 0.5 से 1.0 प्रतिशत घोल अथवा पेट्रोल/किरासन तेल कपड़े में भीगो कर छेद में भरकर, गीली मिट्टी से छेद को भर दें। घोल के बदले सल्फाॅस की टिकिया को भी छेद में डाल जा सकता है।
रोग और उनकी रोकथाम
1. चूर्णी फफंद आधा मिली. कैराथेन 1 लीटर पानी में डालकर तीन छिड़काव फरवरी-मार्च में 15 दिनों के अन्तराल पर करें।
2. एन्थ्रकनोज (श्यामपर्ण) ब्लाइटाॅस 50 के 2.5 मिली. एक लीटर पानी में डालकर तीन छिड़काव फरवरी से मार्च के मध्य तक करें। ब्लाईटाक्स 50 के बदले चार मिली. कैलेथीन प्रति लीटर पानी में डालकर अथवा 2 मिली. बैविस्टीन प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है।
3. गुच्छारोग (मालफारमेशन)
(क) वानस्पतिक गुच्छा रोग 1 लीटर पानी में 2 मिली. की दर से ब्लाईटाॅक्स 50 का घोल बनाकर छिड़काव करें।
(ख) पुष्पक्रम गुच्छा रोग अक्टूबर में 2000 पी.पी.एम. नैप्थेलीन एसिटिक एसिड का छिड़काव करें। दिसम्बर-जनवरी के महीने में पुष्पक्रमों को काट दें।
ये भी पढ़ें Daily Technology Tips for Everyday use Geek Help
भारत में फलों का राजा माना जाने वाला आम (Mango) न केवल स्वाद और पोषण में अव्वल है, बल्कि किसानों और बागवानों के लिए एक अत्यधिक लाभदायक और दीर्घकालिक व्यावसायिक फसल भी है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है। आम की बागवानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय में बहुगुणित वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सही वैज्ञानिक प्रबंधन और उन्नत तकनीकों के साथ आम की बागवानी की जाए, तो यह कई दशकों तक लगातार बेहतरीन मुनाफा देती है।
आम के बाग से अधिकतम और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करने के लिए उपयुक्त जलवायु, उन्नत किस्मों का चयन, खेत की तैयारी, सधाई व छंटाई (Pruning), संतुलित खाद एवं उर्वरक, और कीट-रोग प्रबंधन का सही ज्ञान होना अति आवश्यक है। इस लेख में हम आपको आम की उन्नत बागवानी करने का सही तरीका (Mango Cultivation Guide in Hindi) विस्तार से बता रहे हैं। कृषि और बागवानी से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए हमारी Kheti Kisani Category को भी अवश्य पढ़ें।
1. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी (Climate & Soil Requirements)
आम उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय (Tropical & Subtropical) जलवायु का पौधा है जो विविध जलवायु परिस्थितियों में आसानी से अनुकूलित हो जाता है:
- जलवायु व तापमान: आम की अच्छी वृद्धि के लिए 24°C से 30°C का तापमान आदर्श माना जाता है। हालांकि, यह पौधा 40°C से अधिक गर्मी भी सहन कर सकता है। मंजर (फूल) आने और फल बनने के समय मौसम का शुष्क और कोहरा-रहित होना आवश्यक है।
- मिट्टी का चयन: आम की खेती के लिए जल निकासी वाली गहरी, उपजाऊ दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है।
- pH मान और जल निकासी: मिट्टी का pH मान 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए, क्योंकि ठहरा हुआ पानी जड़ों को सड़ने का कारण बनता है।
2. आम की उन्नत और व्यावसायिक किस्मों का चयन (Top Mango Varieties)
क्षेत्रीय मांग और निर्यात (Export) संभावनाओं को ध्यान में रखकर ही किस्मों का चुनाव करें:
- उत्तरी व मध्य भारत की किस्में: दशहरी, लंगड़ा, चौसा, और लखनऊ सफेदा।
- दक्षिणी व पश्चिमी भारत की किस्में: अल्फांसो (हापुस), केसर, तोतापरी, और नीलम।
- हाइब्रिड एवं सघन बागवानी हेतु किस्में: आम्रपाली (सघन बागवानी के लिए सर्वोत्तम), मल्लिका, और पूसा श्रेष्ठ।
- सदाबहार व विदेशी किस्में: ऑल टाइम मैंगो और मियाज़ाकी (Miyazaki)।
अन्य दीर्घकालिक और व्यावसायिक बहुवर्षीय बागवानी फसलों के बारे में पढ़ने के लिए देखें Awla Ki Kheti Ka Asaan Aur Sahi Tarika. शुष्क और बंजर भूमि में फलदार पौधे लगाने के तरीके जानने के लिए Ber Ki Kheti Karne Ka Sahi Tarika पढ़ें।
3. खेत की तैयारी और गड्ढे खोदना (Field Preparation & Digging Pits)
आम एक विशालकाय बहुवर्षीय वृक्ष है, इसलिए शुरुआत में गड्ढों की सही तैयारी पौधे के जीवनभर के विकास का आधार बनती है:
- पौधों की दूरी (Spacing): पारंपरिक बागवानी के लिए 10×10 मीटर की दूरी पर पौधे लगाएं (प्रति एकड़ लगभग 40 पौधे)। यदि आप सघन बागवानी (High-Density Plantation) जैसे आम्रपाली किस्म लगा रहे हैं, तो 2.5×2.5 मीटर की दूरी रखें (प्रति एकड़ लगभग 640 पौधे)।
- गड्ढों का आकार: मई-जून के महीने में 1x1x1 मीटर आकार के गड्ढे खोद लें।
- गड्ढा भरना: गड्ढों को 15-20 दिनों के लिए धूप में खुला छोड़ दें। इसके बाद ऊपरी मिट्टी में 25-30 किग्रा सड़ी हुई गोबर की खाद, 1 किग्रा सिंगल सुपर फास्फेट और 100 ग्राम ट्राइकोडर्मा मिलाकर गड्ढे को भर दें।
जैविक खाद और कंपोस्ट बनाने की सही विधि के लिए पढ़ें Desi Khad Kaise Banaye.
4. पौध रोपाई और प्रवर्धन (Planting & Propagation Method)
आम के बाग में कभी भी बीज से उगे (बीजू) पौधे न लगाएं, क्योंकि उनमें फल देरी से आते हैं और गुणवत्ता अनिश्चित होती है। हमेशा **ग्राफ्टेड/कलमी पौधे (Inarched / Veneer Grafted)** ही लगाएं।
- रोपाई का सही समय: मानसून का मौसम (जुलाई से सितंबर) पौध रोपाई के लिए सबसे उत्तम होता है। जहाँ सिंचाई की अच्छी व्यवस्था हो, वहाँ फरवरी-मार्च में भी रोपाई की जा सकती है।
- रोपाई तकनीक: गड्ढे के मध्य में छोटा सा छेद करके पौधे की पिंडी (Root Ball) को रखें, पॉलीथीन हटा दें और चारों ओर से मिट्टी दबा दें। रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करें।
कॉर्पोरेट और कांट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल के तहत बागवानी के नियमों को समझने के लिए देखें Contract Farming Kya Hota Hai.
5. छंटाई, सिंचाई और अंतर-फसली खेती (Pruning, Irrigation & Intercropping)
शुरुआती सालों में पौधे की बनावट और सही सिंचाई प्रबंधन बंपर पैदावार सुनिश्चित करता है:
- सधाई व छंटाई (Training & Pruning): शुरुआती 2-3 वर्षों में जमीन से 1 मीटर की ऊंचाई तक तने पर कोई शाखा न निकलने दें। केंद्र को खुला रखें ताकि धूप और हवा अंदर तक पहुंचे। सूखे और रोगी टहनियों को नियमित काटें।
- सिंचाई प्रबंधन: छोटे पौधों को गर्मी में 5-7 दिनों और सर्दियों में 10-12 दिनों के अंतराल पर पानी दें। फल बनने के दौरान (मार्च से मई) नियमित सिंचाई करें। मंजर (फूल) आते समय सिंचाई रोक देनी चाहिए ताकि फूल न गिरें।
- अंतर-फसली खेती (Intercropping): आम का बाग 5-6 साल में बड़ा होता है। इस दौरान खाली जगह में दलहनी फसलें, सब्जियां, पपीता या हल्दी उगाकर अतिरिक्त आय कमाएं।
प्राकृतिक और कीटनाशक-रहित अंतर-फसली खेती के तरीकों के लिए पढ़ें Pesticide Free Vegetable Farming Guide.
6. प्रमुख कीट एवं रोग प्रबंधन (Pest & Disease Control)
आम की फसल को कुछ प्रमुख कीट और बीमारियां काफी नुकसान पहुंचाते हैं:
- भुनगा या हॉपर (Mango Hopper): यह कीट मंजर और नए कोपलों का रस चूसता है। इसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड या नीम तेल का छिड़काव करें।
- गुच्छा रोग (Malformation): इसमें मंजर गुच्छेदार और बाँझ हो जाते हैं। प्रभावित गुच्छों को तोड़कर नष्ट कर दें।
- पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery Mildew): फूलों पर सफेद पाउडर जैसा जम जाता है। घुलनशील गंधक (Wettable Sulphur) का छिड़काव करें।
- फल मक्खी (Fruit Fly): फलों में कीड़े पड़ने से बचाने के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाएं।
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की आधिकारिक योजनाओं के लिए National Horticulture Board (NHB) पोर्टल विजिट करें। कृषि शोध एवं तकनीकों हेतु Indian Council of Agricultural Research (ICAR) की वेबसाइट देखें।
7. तुड़ाई, भंडारण और मुनाफा (Harvesting, Storage & Profit)
कलमी पौधे रोपाई के चौथे या पांचवें वर्ष से फल देना शुरू कर देते हैं और 50-60 वर्षों तक फल उत्पादन जारी रहता है:
- तुड़ाई (Harvesting): फलों की तुड़ाई हमेशा डंठल (Stalk) के साथ 2-3 सेमी छोड़कर करें ताकि फल खराब न हों।
- उत्पादन: एक 10-12 साल पुराना वयस्क पेड़ प्रतिवर्ष 100 से 200 किग्रा तक फल देता है। सघन बागवानी (आम्रपाली) में प्रति एकड़ 8 से 10 टन तक उपज आसानी से प्राप्त होती है।
- भंडारण और मुनाफा: फलों को सुरक्षित रखने की विधियों के लिए पढ़ें Anaj Bhandaran Karne Ka Sahi Tarika. सही प्रबंधन से किसान प्रति एकड़ 2 से 4 लाख रुपये तक का सालाना शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल के लिए Ministry of Agriculture & Farmers Welfare पर विजिट करें।
8. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (10 FAQs)
1. आम का पौधा कितने साल में फल देना शुरू कर देता है?
कलमी या ग्राफ्टेड (Grafted) पौधे रोपाई के लगभग 3 से 4 साल बाद फल देना शुरू कर देते हैं, जबकि बीज से उगाए गए (बीजू) पौधों में 8 से 10 साल का समय लगता है।
2. एक एकड़ में आम के कितने पौधे लगाए जा सकते हैं?
10×10 मीटर की सामान्य दूरी पर लगभग 40 पौधे लगाए जाते हैं। वहीं सघन बागवानी (High-Density Plantation) में आम्रपाली जैसी किस्मों के 2.5×2.5 मीटर की दूरी पर प्रति एकड़ 640 पौधे तक लगाए जा सकते हैं।
3. आम के बाग में मंजर (फूल) आते समय पानी देना चाहिए या नहीं?
आम में मंजर (फूल) आने के दौरान सिंचाई पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए। यदि इस समय पानी दिया जाएगा तो फूल गिर सकते हैं और नई पत्तियां निकलने लगेंगी।
4. आम की सबसे अच्छी हाइब्रिड किस्म कौन सी है?
आम्रपाली और मल्लिका भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित सबसे लोकप्रिय हाइब्रिड किस्में हैं, जो हर साल नियमित रूप से मीठे और गुणवत्तापूर्ण फल देती हैं।
5. आम के पेड़ से फल गिरने का क्या कारण होता है?
पोषक तत्वों की कमी, सिंचाई का असंतुलन, तेज हवाएं और कीट या फफूंद जनित बीमारियाँ आम के छोटे फलों (मटर के आकार) के गिरने के मुख्य कारण होते हैं।
6. आम के पौधे लगाने का सबसे सही समय कौन सा है?
आम के पौधे लगाने का सबसे उपयुक्त समय मानसून का मौसम (जुलाई से सितंबर) होता है। जहाँ सिंचाई के साधन मौजूद हों, वहाँ फरवरी-मार्च में भी रोपाई की जा सकती है।
7. क्या आम के बाग में अंतर-फसली खेती (Intercropping) की जा सकती है?
हाँ, शुरुआती 4 से 5 वर्षों में आम के पौधों के बीच खाली जगह में मूंग, उड़द, चना, हल्दी, अलोवेरा या मौसमी सब्जियाँ आसानी से उगाई जा सकती हैं।
8. आम के गुच्छा रोग (Malformation) से बचाव के लिए क्या करें?
गुच्छा रोग से प्रभावित फूलों व टहनियों को काट कर जला दें और अक्टूबर-नवम्बर के महीने में नेफ्थलीन एसिटिक एसिड (NAA) 200 ppm का छिड़काव करें।
9. एक एकड़ आम के बाग से कितनी पैदावार मिल सकती है?
पूर्ण विकसित पारंपरिक बाग से प्रति एकड़ 4 से 6 टन और सघन बागवानी पद्धति (High Density) से प्रति एकड़ 8 से 10 टन तक आम की पैदावार प्राप्त की जा सकती है।
10. एक एकड़ आम के बाग से सालाना कितना मुनाफा हो सकता है?
सही किस्म, देखरेख और बाजार मूल्य मिलने पर सभी खर्च निकालकर एक एकड़ आम के बाग से प्रतिवर्ष 2 से 4 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है।