भारत में दलहनी फसलों (Pulses) में मूंग की खेती (Mung Bean / Green Gram Cultivation) का एक विशेष स्थान है। मूंग न केवल कम समय (60 से 70 दिन) में पककर तैयार होने वाली फसल है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता (Soil Fertility) को बढ़ाने में भी बहुत मददगार साबित होती है। इसकी जड़ों में पाए जाने वाले राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करते हैं, जिससे अगली फसल के लिए यूरिया और रसायनों की आवश्यकता काफी कम हो जाती है।
मूंग को खरीफ (Monsoon) और जायद (Summer) दोनों सीजनों में आसानी से उगाया जा सकता है। कम लागत, कम पानी और कम समय में अधिक मुनाफा देने के कारण यह किसानों के बीच बेहद लोकप्रिय फसल बनती जा रही है। सही वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत किस्मों और सटीक प्रबंधन से प्रति एकड़ बंपर पैदावार प्राप्त की जा सकती है। इस विस्तृत लेख में हम आपको मूंग की खेती करने का आसान और सही तरीका विस्तार से बता रहे हैं। कृषि और बागवानी से जुड़ी अन्य उपयोगी जानकारियों के लिए हमारी Kheti Kisani Category को भी अवश्य विजिट करें।
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1. उपयुक्त जलवायु और मिट्टी का चुनाव (Climate & Soil Requirements)
मूंग की फसल के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसके पौधों का विकास और फलियों का गठन मौसम के तापमान पर काफी हद तक निर्भर करता है:
- तापमान: मूंग के बीजों के अंकुरण के लिए 25°C से 30°C तापमान सबसे उत्तम होता है। फसल की वृद्धि और फलियों के पकने के समय 30°C से 35°C का तापमान आदर्श माना जाता है। अत्यधिक ठंड या पाला फसल को गंभीर नुकसान पहुँचाता है।
- उपयुक्त मिट्टी: जल निकासी वाली बलुई दोमट (Sandy Loam) या मटियार दोमट मिट्टी मूंग के लिए सबसे अच्छी होती है। हल्की क्षारीय या अमलीय मिट्टी में इसका उत्पादन प्रभावित होता है।
- pH मान और जल निकासी: मिट्टी का pH मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। ध्यान रहे कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि जलजमाव से पौधे पीले पड़कर सड़ने लगते हैं।
2. मूंग की उन्नत किस्मों का चयन (High-Yielding Moong Varieties)
अधिक उत्पादन प्राप्त करने और पीला मोज़ेक वायरस (Yellow Mosaic Virus) जैसे जानलेवा रोगों से फसल को बचाने के लिए उन्नत और रोग-प्रतिरोधी बीजों का ही चयन करें:
- आई.पी.एम. 02-3 (IPM 02-3 / मेहा): यह किस्म जायद और खरीफ दोनों मौसमों के लिए उपयुक्त है। यह लगभग 60-65 दिनों में पककर तैयार हो जाती है और पीला मोज़ेक रोग के प्रति प्रतिरोधी है।
- एस.एम.एल. 668 (SML 668): जायद (गर्मी) के मौसम के लिए एक अत्यंत लोकप्रिय किस्म है। यह 60 दिनों में पकती है और इसके दाने बड़े व चमकदार होते हैं।
- विराट (IPM 205-7): यह बेहद कम समय (55 से 60 दिन) में पकने वाली किस्म है, जो जायद में समय पर फसल चक्र पूरा करने के लिए उत्तम मानी जाती है।
- के-851: यह किस्म 65-70 दिनों में पकती है और औसतन 10-12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार देती है।
सर्दियों के सीजन में उगाई जाने वाली प्रमुख दलहनी फसलों की वैज्ञानिक जानकारी के लिए पढ़ें Chana Ki Kheti Karne Ka Sahi Tarika। बीज वितरण और राष्ट्रीय सिफारिशों के लिए आप Indian Council of Agricultural Research (ICAR) की आधिकारिक साइट देख सकते हैं।
3. खेत की तैयारी और बीजोपचार (Field Preparation & Seed Treatment)
मूंग की बुवाई से पहले खेत की सही तैयारी और बीजों का उपचार करना बंपर पैदावार की नींव रखता है:
- खेत की तैयारी: खेत की पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें। इसके बाद 2 से 3 जुताई कल्टीवेटर या हैरो से करके मिट्टी को भुरभुरा बना लें। अंतिम जुताई से पहले समतल पाटा (Plank) चलाएं ताकि सिंचाई का पानी समान रूप से फैल सके।
- बीज की मात्रा (Seed Rate): खरीफ सीजन के लिए 12-15 किग्रा प्रति हेक्टेयर (5-6 किग्रा प्रति एकड़) और जायद (गर्मी) सीजन के लिए 20-25 किग्रा प्रति हेक्टेयर (8-10 किग्रा प्रति एकड़) बीज की आवश्यकता होती है।
- बीजोपचार (Seed Treatment): फफूंद जनित रोगों से सुरक्षा के लिए बीजों को ट्राइकोडर्मा (Trichoderma) 5 ग्राम प्रति किग्रा बीज या थिरम/कार्बेन्डाजिम से उपचारित करें। इसके बाद बीजों को **राइजोबियम कल्चर (Rhizobium Culture)** और **पी.एस.बी. कल्चर (PSB Culture)** से उपचारित करके छाया में सुखाकर ही बोएं।
जैविक खाद और केंचुआ खाद के घर पर निर्माण और प्रयोग विधि जानने के लिए Desi Khad Kaise Banaye पढ़ें।
4. बुवाई का समय और सही तरीका (Sowing Season & Method)
समय पर बुवाई करने से पौधों का समुचित विकास होता है और कीट-रोगों का हमला काफी कम होता है:
- जायद (गर्मी) की बुवाई: गेहूं या सरसों की कटाई के तुरंत बाद यानी **15 मार्च से 15 अप्रैल** के बीच जायद मूंग की बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए।
- खरीफ (मानसून) की बुवाई: मानसून की पहली बारिश के बाद **15 जून से 15 जुलाई** तक खरीफ मूंग की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय होता है।
- बुवाई की विधि: बुवाई हमेशा कतारों (Lines) में सीड्रिल की मदद से करें। कतार से कतार की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी रखें। बीज को मिट्टी में 3 से 4 सेमी गहराई पर ही बोएं।
अनुबंधित खेती और आधुनिक कृषि समझौतों को समझने के लिए हमारी गाइड Contract Farming Kya Hota Hai देखें।
5. खाद, उर्वरक एवं सिंचाई प्रबंधन (Fertilizer & Irrigation Guide)
मूंग एक दलहनी फसल होने के कारण हवा से नाइट्रोजन स्वयं बनाती है, इसलिए इसे रासायनिक यूरिया की बहुत कम आवश्यकता होती है:
- उर्वरक की मात्रा: बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर 20 किग्रा नाइट्रोजन, 40-50 किग्रा फास्फोरस (Single Super Phosphate) और 20 किग्रा पोटाश की बेस खुराक कूंड़ों में दें। अत्यधिक नाइट्रोजन देने से केवल पत्तियाँ बढ़ती हैं और फलियाँ कम बनती हैं।
- सिंचाई प्रबंधन (जायद): गर्मी के मौसम में पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद (शाखाएं बनते समय) करें। इसके बाद आवश्यकतानुसार 10-12 दिनों के अंतर पर 3 से 4 सिंचाइयों की जरूरत होती है।
- सिंचाई प्रबंधन (खरीफ): मानसून की फसल में वर्षा होने पर सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन सूखा पड़ने पर फलियों के विकास के समय एक सिंचाई अवश्य करें। **फूल खिलते समय (Flowering Stage) कभी भी पानी न दें**, अन्यथा फूल झड़ जाएंगे।
कम पानी में फसलों की बेहतर सिंचाई और ड्रिप तकनीक के लिए देखें Drip Irrigation System Kaise Lagaye।
6. खरपतवार नियंत्रण और कीट-रोग प्रबंधन (Weed & Pest Control)
फसल को नुकसान से बचाने के लिए शुरुआती 30 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना अनिवार्य है:
- खरपतवार नियंत्रण: बुवाई के 20-25 दिनों बाद पहली निराई-गुराई अवश्य करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए बुवाई के तुरंत बाद (24 घंटे के भीतर) पेंडीमेथालिन (Pendimethalin) का छिड़काव करें।
- पीला मोज़ेक वायरस (Yellow Mosaic Virus): यह मूंग का सबसे खतरनाक रोग है, जो **सफेद मक्खी (Whitefly)** द्वारा फैलता है। इसमें पत्तियां पीली पड़ जाती हैं। इसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) या थियामेथोक्सम का छिड़काव करें।
- फली छेदक सुंडी (Pod Borer): यह कीट फलियों में छेद करके दानों को नुकसान पहुँचाता है। इसके बचाव हेतु फेरोमोन ट्रैप लगाएं और प्रकोप बढ़ने पर नीम का तेल या एमामेक्टिन बेंजोएट का छिड़काव करें।
जैविक और रसायण-मुक्त खेती के तरीकों को विस्तार से जानने के लिए Pesticide Free Vegetable Farming का अध्ययन करें। राष्ट्रीय कृषि नीतियों और योजनाओं के लिए Ministry of Agriculture & Farmers Welfare पोर्टल विजिट करें।
7. फसल की कटाई, गहाई और पैदावार (Harvesting, Yield & Storage)
मूंग की फसल 60 से 70 दिनों में पककर तैयार हो जाती है:
- कटाई का सही समय: जब पौधे की 80% से 85% फलियाँ पककर भूरी या काली हो जाएं, तब फसल की कटाई कर लेनी चाहिए। फलियों को ज्यादा समय तक खेत में छोड़ने पर फलियां चटककर दाने जमीन पर गिर जाते हैं।
- गहाई (Threshing): कटी हुई फसल को 2-3 दिनों तक धूप में अच्छी तरह सुखाने के बाद थ्रेशर या डंडों से पीटकर दाने अलग कर लें।
- औसत पैदावार: उन्नत तकनीकों और सही प्रबंधन से मूंग की औसतन 12 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (5 से 6 क्विंटल प्रति एकड़) तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है।
कटाई के बाद अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए पढ़ें Anaj Bhandaran Karne Ka Sahi Tarika।
8. मूंग की खेती से जुड़े 10 महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)
Q1. मूंग की खेती किस महीने में की जाती है?
Ans: जायद (गर्मी) मूंग की बुवाई 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच और खरीफ (मानसून) मूंग की बुवाई 15 जून से 15 जुलाई के बीच की जाती है।
Q2. एक एकड़ खेत के लिए मूंग का कितना बीज लगता है?
Ans: जायद (गर्मी) सीजन के लिए 8 से 10 किलोग्राम प्रति एकड़ और खरीफ सीजन के लिए 5 से 6 किलोग्राम प्रति एकड़ बीज की आवश्यकता होती है।
Q3. मूंग की फसल कितने दिनों में पककर तैयार हो जाती है?
Ans: मूंग की उन्नत किस्में किस्म और मौसम के आधार पर लगभग 55 से 70 दिनों में पूरी तरह पककर तैयार हो जाती हैं।
Q4. जायद (गर्मी) में मूंग की सबसे अच्छी किस्म कौन सी है?
Ans: जायद सीजन के लिए एस.एम.एल. 668 (SML 668), आई.पी.एम. 02-3 (मेहा) और विराट (IPM 205-7) सबसे बेहतरीन और पीला मोज़ेक प्रतिरोधी किस्में हैं।
Q5. क्या मूंग की फसल में यूरिया खाद देना आवश्यक है?
Ans: मूंग एक दलहनी फसल है जो जड़ों में नाइट्रोजन स्थिर करती है। इसलिए इसे यूरिया की बहुत कम (केवल बुवाई के समय 20 किग्रा/हेक्टेयर) आवश्यकता होती है।
Q6. मूंग की पत्तियों के पीले पड़ने (पीला मोज़ेक) का क्या कारण है और इसका इलाज क्या है?
Ans: यह बीमारी सफेद मक्खी (Whitefly) के कारण फैलती है। इससे बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड या थियामेथोक्सम का छिड़काव करें और प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें।
Q7. क्या मूंग में फूल आते समय सिंचाई करनी चाहिए?
Ans: नहीं, मूंग की फसल में जब फूल खिल रहे हों तो सिंचाई करने से बचना चाहिए। फूल आते समय पानी देने से फूल गिर जाते हैं और फलियां कम बनती हैं।
Q8. जायद मूंग में कितनी सिंचाइयों की आवश्यकता होती है?
Ans: गर्मी की मूंग में आमतौर पर मौसम और मिट्टी की नमी के आधार पर 3 से 4 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।
Q9. प्रति एकड़ मूंग की कितनी पैदावार मिल सकती है?
Ans: वैज्ञानिक प्रबंधन और उन्नत बीजों के इस्तेमाल से प्रति एकड़ औसतन 5 से 6 क्विंटल तक मूंग का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
Q10. मूंग की खेती के बाद अगली कौन सी फसल बोनी चाहिए?
Ans: जायद मूंग के बाद खेत में धान (Paddy), मक्का (Maize) या बाजरा बोना चाहिए, क्योंकि मूंग मिट्टी में भरपूर नाइट्रोजन छोड़कर जाती है।