पासपोर्ट बनवाना हुआ आसान नहीं होगी पुलिस वेरिफिकेशन की जरुरत, पूरी जानकारी-

आजकल कही भी अपने देश से बाहर जाने के लिए हमें पासपोर्ट की जरुरत होती है | पासपोर्ट बनवाने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी होता है | पुलिस वेरिफिकेशन करवाना जिसमे काफी टाइम लगता है | कभी कभी पुलिस वेरिफिकेशन की वजह से हमारा पासपोर्ट नहीं बन पता है |

अगर में जल्दी ही किसी काम से जाना पड़े तो पासपोर्ट की वजह से भी हमारे कार्य में देरी और निराशा का सामना करना पड़ता है. | लेकिन अब ऐसा नहीं होगा | अब आपको पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस के सत्यापन की जरुरत नहीं पड़ेगी | क्योकि केंद्रीय सरकार ने अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम प्रोजेक्ट (सीसीटीएनएस) को जोड़ने की योजना 2009 में UPA सरकार की मदद से बनाई है |यह योजना अपने विदेश जाने के लिए एक नए पासपोर्ट बनवाने के लिए जो शारीरिक पुलिस सत्यापन यानि कि पुलिस वेरिफकेशन की जरुरत को अब खत्म कर देगा |

सीसीटीएनएस के Implementation के साथ अब पुलिस शारीरिक सत्यापन प्रक्रिया कुछ ही क्लिक्स की सहायता से इसको सरल बना दिया है |और जो लोग पुलिस अधिकारियों को रिश्वत देकर अपने पते और पहचान का सत्यापन कराते थे | इसकी सहायता से वो भी अब बंद कर दी जायगी | राजीव मेहरिशी जो कि केंद्रीय गृह के संचालक है | उन्होंने कहा ,” कि सीसीटीएनएस, पूरा राष्ट्रीय डेटाबेस क्राइम और क्रिमनल्स का विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट से जोड़ने की भी सभावना है | अब सीसीटीएनएस एक क्लिक करके पासपोर्ट आवेदकों की पूरी हिस्ट्री और पते की जाँच कर लेगा |

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श्री मेहरिशी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया ,” कि पासपोर्ट प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कुछ राज्यों की पुलिस पहले से ही सीसीटीएनएस का इस्तेमाल कर रही है |” गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट की परियोजना शुरू होने के बाद देश के सभी 15,398 पुलिस स्टेशनो को इससे जोड़ देगा | और श्री मेहरिशी जी ने कहा,” सीसीटीएनएस को नागरिक केंद्रित सेवाओं जैसे सत्यापन को शामिल करके उसे उपयोग करने लिए विस्तारित किया गया | जिससे यह पता चल जायगा कि उस व्यक्ति इसमें सहमति है |

श्री सिंह ने कहा कि सीसीटीएनएस ने देश के 15,398 से 13,777 पुलिस स्टेशनों का परिणाम सॉफ्टवेयर में 100% डाटा रजिस्टर करने के लिए कर दिया है। और उन्होंने कहा कि अब तक, सीसीटीएनएस राष्ट्रीय डेटाबेस में पहले से ही पुराने और अभी के आपराधिक मामलों से संबंधित 7 करोड़ रिकॉर्ड मौजूद हैं। यह परियोजना पूरे देश में लगभग 15,398 पुलिस स्टेशनों और पुलिस अधिकारियों के 5,000 कार्यालयों को जोड़ने की सम्भावना है।

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